Tuesday, 11 July 2017

सरै गौंव सुनसान नजर औन्दु


यूं तिबारी - डिंडालियों मा 
अब क़िबलाट नी सुणेन्दु 
यूं चौक डिंडालियों मा 
भी क़्वी बैठण कु नी औन्दु 
छाजा - गुठ्यार मा 
क़्वी भैंसु नी रमंदु 
अर सरै गौंव खोळा मा 
क़्वी मनिख नी दिखेंदु 
कखी मेरी आँखि अर कन्दोड़ी 
फूटी ता नी गे होला 
किलै कि न कुछ दिखेंदु 
अर न कुछ सुणेन्दु 
सरै गौंव सुनसान नजर औन्दु 
सरै गौंव सुनसान नजर औन्दु 
© विनोद जेठुड़ी ११/०७/२०१७ 

Tuesday, 27 June 2017

दारु प्रेमी उत्तराखंड सरकार

धन्य हे उत्तराखंड सरकार

तेरी महिमा अपरम्पार
दारु प्रेमी दारुबिना नी रैंदी
अर सुचदी कि .......
दारु सी ही होलू उद्धार 

रास्ट्रीय सड़क छन जू हमारी
त्यों तै जिला सड़क बणियाली 
अर त्यों सडकियों  ऐथर-पैथर
दारु का त्वेन ठीका खोलियाली
धन्य हे उत्तराखंड सरकार
त्वेन बडू काम करियाली
पलायन तै रुकणु कु यू
बडू बेहतरीन तर्क खोजियाली
माँ बहिंणियों  विरोध करी जू
त्यों पर त्वेन लाठी चलैयाली 
ईन क्या जूर्म करी जू
पूलिस की पुरी फ़ोर्स लगैयाली
धन्य हे त्रिवेन्द्र सरकार
दारु सी इन क्या मोह ह्वे ग्यायी ?
रोंदी बिलखदी मां बहिणियों पर
जरा भी त्वे दया नी आयी ?

यीं दारू  जाणी !
कत्यों की मवासी घाम लगाई 
जूं चुलखेन्दो मा पकदी छी रुठ्ठी
त्यों चुल्लों की आग बुझाई
जूंक अपणा गैन दारू सी
त्युंकी त्वे पर लगली हाई
सुणी ले हे त्रिवेन्द्र सरकार
समळी जा अभी भी कुछ नी ह्वायी
बन्द करै दे त्यों ठिक्कों तै
जूं तै त्वेन जबरदस्ती.....
गौं सडकियों  धोर खुलाई 

मीन सूणी त्वेन हाल ही मा
textएक नयी योजना चलाई 
जू क्वी जै नी सकदू ठिक्को
त्योंतै त्वेन दारू की वैन चलाई
समली जा बगत  अभी भी
निथर भरी देर हवे जाली
जवीं दारू मा सुख दिखणी छैं
त्या दारू ही त्वेतै डुबाली
समळी जा हे उत्तराखंड सरकार
निथर भरी देर ह्वे जाली

ईन क्या  यीं दारू मा
जू दारू सी ईत्का लोभ ह्वे ग्यायी 
textदारू का ठिक्कों मा ही
कुबेर  भंडार दिख्यायी 
देख धी ऊंची डांडी कांठी
ह्यों-हिंवाळियों मा जडी  बूटी
पर्यटन का अपार सम्भावना छ्न
पर जरा सी वे पर काम करा धी
हौलीवुड बौलीवुड वाळों तै
फ़िल्म बणाण कु न्योतु दिवा धी
विदेशी पर्यटकों तै अपणी
स्वर्ग जन यीं धरती दिखा धी
वेदनी बुग्यालों मा कैम्प लगावा
ऋषिकेश तै योग सिटी बना धी
टिहरी  अनेरू पानी मा
नावों की रेस लगा धी
नैनीतालदेहरादून मसूरी
तै स्मार्ट सिटी बना धी
पलायन करी गें जू अपणा भै-बंद
ऊतै वापस घौर बुला धी
उत्तराखंड तै समर्ध बणाणु
कुछ ता जरा सी जातन करा धी
पर अफसोस कि
उत्तराखंड सरकार तै बस
दारु मा ही कुबेर का भण्डार दिखेंदू
दारू मा ही विकाश दिखेंदु छ 


© विनोद जेठुड़ी 

Monday, 27 June 2016

Garwali Poetry - Ekulwas (ईकुल्वास)

चखुलियों कु चैंच्याट मची गेधार मा त्यू घाम येगे
खडु उठ हे मंगथु बेटामुक धो अर आग जगै दे   |
मीन ............
मोळु गाडे देभैंसू पिजै देभैर कु काम सब निपटै दे
रतब्याणी बटी रबडा-रबडीखडु उठ अब एक घुट चाय पिलै दे ||

एक घत्ती पाणी ले दे धी अरनये धुये क भी तू येजै
कल्यो पकैक धर्युं छ मेरुखैक तू स्कुल चली जै  |
सुण ..............
गोर लिगी जैडांडा बटे देहाफ़ टैम मा दिखदी भी रै
ब्याखुनी दां जब छुट्टी होलीगोरो तै भी घर लेक औयी ||

तेरु भी बाबा बुरु हाल ह्वेगेकाम कु बोझ सरा त्वे पर येगे
भोल तीन लखडों कु जाणआज छुट्टी की अर्जी दे दे   |
अर हां स्कुल जाण सी पहली ..........................
भूल्ली तै दुध पिलै देभितर ग्वाडी देभैर बटी ताळु मारी दे
दिन मा औलु मी एक घडी कुचाभी भैर ब्यांर धारी दे ||

घास कु आज मै गदन ही जौलुरोपणी मा भी पाणी ळगौलु
बडी मुस्किल सी आयी बारीसरै पुंगडियो तै सौकी औलु |
हे जी हमार भी बखर खुलयानभोळ मै तुमार बखर लिजौलु
तूम भग्यानोन ही साथ दे मेरुतुमारु अहसान मै कन कै द्योलु ||

कचापिच ये बस्गाळ मा ह्वेगेखुट्टियों पर मेरु कादौं लगिगे
यीं द्योरी पर भी कांड लग्यां छ्नभितर च्वींक त्यू छ्लपंदु ह्वेगे |
येंसु रुडियो मा ये कुड तै छौळुमोरी-संगाडो तै भी ऊच्योळु
कुछ पैसा मंगथु कु बाबा अर, कुछ पैसा मै भी कमौलु ||

मुंडै बाण की चकडात पुडीं छकैमु झी मै हौळ लगौलु
जेठा जी होर तुम ही लगै द्यातुमारु सिवा अब कैमु जौलु |
धनकुर बुळ्या धनकुर द्योळुध्याडी बुळ्या ध्याडी दिलौलु
बळ्दो तै घास पाणीघर मु ही पहुँचै द्योलु ||

"ईखुली ईखुली मा चखुली की आस, ईखुली रैण कु ऊ अहसास
अपणु ही घर होंदु वनवास, कभी ना कै पर लगु ईकुल्वास" -


 ©  विनोद जेठुडी

Saturday, 28 May 2016

बचपन क ऊ बाळपन - Childhood

दुबई मा 27 मई  तै आयोजित "उत्तराखँडी काब्य एवँ सांस्कृतिक सम्मेलन" - 2016 मा मीन अपणी या कविता " बचपन क ऊ बाळपन" कु कविता पाठ करी । आप सभी दगडियोँ कु दगड समल्यात छौ कनु आशा करदु कि आपतै पँसद आली । 


दिन ता ऊ थौनजू गुजिरीन गौँव मा
बचपन क वे बाळापन मा । 
अब ता बस जीणा छाँ हम 
जिन्दगी क ये जँजाळ मा ॥ 

बचपन क ऊ दिन भी बड़ा अजीब होन्द थौ 
तिबारी डिँडाळियोँ मा चखळ पखळ कुटमदारी मा रैन्द थौ 
माँ जी कु प्यार अर पिताजी कु दुलार 
ता दादी दादा घुघौती खिलैतैकथा सुणादँ थौ 
भैजी सुटकी की डौर सी हमतै पढाँदु थौ 
ता दिदी हमारु बाँठ कु काम, खुद ही कै देंदी थौ 

दिन ता ऊ थौनजू गुजिरीन गौँव मा 
बचपन क वे बाळापन मा । 
अब ता बस कटणा छँ दिन 
जिन्दगी क ये मायाज़ाळ मा 

 न सोच न फिकर न लोभ न लालच 
बस खिलण मा ही मस्त रैद थौ 
कभी पिल्ला गोळी ता कभी गिल्ली डँडा
अर क्रिकेट मा ता अलग ही नियम होन्द थौ 
मथली पुँगडी मारी ता द्वी रन
बिल्ली पुँगडी आउट होन्दु थौ
अगर मरीयाली जू नथ्थू दादा होर की धुरपळी मा 
ता बौल भी खुद ही लेण पुडदी थौ । 

दिन ता ऊ थौनजू गुजिरीन गौँव मा 
बचपन क वे बाळापन मा । 
अब ता बस जीणा छँ हम 
जिन्दगी क ये जँजाळ मा 

तमलेट अर कँटर बजै - बजै क हम पाणी तै जाँद थौ 
8-10 घत्ती पाणी ता ख्याल ही ख्याल मा लाँद थौ 
ब्याखुनी दौँ पाणी कु धार मु अपनी ...  
अगल्यार औन्दी औंदी कभी रात पुडी जांदी थौ
ता कभी भिगी तै तरबुन्द ह्वे जाँद थौ 
जब फुट्याँ भाँडो परन, मुँड तुनसरै पाणी चुँवी जांदू थौ 

 दिन ता ऊ थौनजू गुजिरीन गौँव मा 
बचपन क वे बाळापन मा । 
अब ता बस कटणा छँ दिन 
ऊँ बचपन वळी खुशियोँ तै खुज़ाण मा 

सरै गौँव मा एक ही टीवी होन्दु थौ 
अर तख टीवी दीखण वालों कीबड़ी भीड रैन्दी थौ 
शक्तिमान दिखण क बाद......
हम भी उडण कि कोशिस करद थौ 
अगर विसियार जू कभी लगी गे गौँव मा
रुमक बटीन रतब्याणी कु पता ही नी चलदु थौ । 

दिन ता ऊ थौनजू गुजिरीन गौँव मा 
बचपन क वे बाळापन मा । 
​खुशनसीब छन ऊ जू रैँद गौँव मा 
ताजी हवा शुध पाणी ​सँँग मा 

बार त्यौहारोँ मा गौवॅ मा, बडी रौनक रैदी थौ 
होळी मा हुलेरियोँ की टोली अर, 
बग्वाळियोँ मा भैलु की लडै होन्दी थौ 
फूलोँ कु महिना सुरज औण सी पहली 
​फ्योली क फूलोँ सी भुरीँ कँडी लेन्द थौ 
फिर फूल संग्राँद तै, देळ नगाँण क बाद 
बिखोदी तै मंदाण मा, गीत सुण मा बडू आनंद औंदु थौ 

दिन ता ऊ थौनजू गुजिरीन गौँव मा 
बचपन क वे बाळापन मा । 
अब ता बस खुदेणु रैँदु यु मन 
ऊँ गौँव खोळो की याद मा  

​स्कूल जाँदी दौँ की, रौनक ही अलग रैँदी थौ 
सरै गौँव क स्कूलिया जब, कठ्ठी जाँद थौ 
बाठ मा अगर कैकी कखडी दिखे गे...
ता वीँ कखडी तै चोरी क, सभी मिली बाँटी क खाँद थौ 
स्कूल मा गुरुजी भी कुछ, सजा इन द्यादँ ​थौ 
कि मुर्गा बणै - बणै तै पाठ, याद कराँद थौ 

दिन ता ऊ थौनजू गुजिरीन गौँव मा 
बचपन क वे बाळापन मा । 
काश कि फिर सी औन्दु बचपन 
बढदी ज्वानी कु यीँ ऊकाळ मा 
काश कि फिर सी हँसादु बचपन 
काश कि फिर सी औन्दु बचपन - 2



 © विनोद जेठुडी, 26 मई 2016