Thursday, 23 May 2013

ईकुल्वास

17 जनवरी 2012 क बाद करिब डेढ साल बाद मीन कलम उठाई अर एक कविता लिखी ऊ भी बडी मुस्किल सी सम्मेलन क खातिर, पतानी क्या हुवे धी समय ही नी मिलदु अब त़ा| दुबई मा हर साल हम लोग उत्तरांचली काब्य एंव सांस्क्रतिक सम्मेलन करदां, ये साल २०१३ मा मेरी कविता कु श्रिषक छ "ईकुल्वास" जू की आप सभी दगडियो दगड शेयर कारनु छौ, आशा करदु कि आप सभी दगडियो तै भी पसंद आली।          


चखुलियों कु चैंच्याट मची गेधार मा त्यू घाम येगे
खडु उठ हे मंगथु बेटामुक धो अर आग जगै दे   |
मीन ............
मोळु गाडे देभैंसू पिजै देभैर कु काम सब निपटै दे
रतब्याणी बटी रबडा-रबडीखडु उठ अब एक घुट चाय पिलै दे ||

एक घत्ती पाणी ले दे धी अरनये धुये क भी तू येजै
कल्यो पकैक धर्युं छ मेरुखैक तू स्कुल चली जै  |
 सुण ..............
गोर लिगी जैडांडा बटे देहाफ़ टैम मा दिखदी भी रै
ब्याखुनी दां जब छुट्टी होलीगोरो तै भी घर लेक औयी ||

तेरु भी बाबा बुरु हाल ह्वेगेकाम कु बोझ सरा त्वे पर येगे
भोल तीन लखडों कु जाणआज छुट्टी की अर्जी दे दे   |
अर हां स्कुल जाण सी पहली ..........................
भूल्ली तै दुध पिलै देभितर ग्वाडी देभैर बटी ताळु मारी दे
दिन मा औलु मी एक घडी कुचाभी भैर ब्यांर धारी दे ||

घास कु आज मै गदन ही जौलुरोपणी मा भी पाणी ळगौलु
बडी मुस्किल सी आयी बारीसरै पुंगडियो तै सौकी औलु |
हे जी हमार भी बखर खुलयानभोळ मै तुमार बखर लिजौलु
तूम भग्यानोन ही साथ दे मेरुतुमारु अहसान मै कन कै द्योलु ||

कचापिच ये बस्गाळ मा ह्वेगेखुट्टियों पर मेरु कादौं लगिगे
यीं द्योरी पर भी कांड लग्यां छ्नभितर च्वींक त्यू छ्लपंदु ह्वेगे |
येंसु रुडियो मा ये कुड तै छौळुमोरी-संगाडो तै भी ऊच्योळु
कुछ पैसा मंगथु कु बाबा अर, कुछ पैसा मै भी कमौलु ||

मुंडै बाण की चकडात पुडीं छकैमु झी मै हौळ लगौलु
जेठा जी होर तुम ही लगै द्यातुमारु सिवा अब कैमु जौलु |
धनकुर बुळ्या धनकुर द्योळुध्याडी बुळ्या ध्याडी दिलौलु
बळ्दो तै घास पाणीघर मु ही पहुँचै द्योलु ||

"ईखुली ईखुली मा चखुली की आस, ईखुली रैण कु ऊ अहसास
अपणु ही घर होंदु वनवास, कभी ना कै पर लगु ईकुल्वास 
कभी ना कै पर लगु ईकुल्वास, कभी ना कै पर लगु ईकुल्वास"


 Copyright @ Vinod Jethuri
On 06/05/2013 to 13/05/2013 every morning at 6:30 A.M