Friday, 28 May 2010

भली मयाली मुखुडी (गढवाली शायरी)

दिखणु छौ ता दिखदु रैगे.
 सुचणु छौ ता सुचदु रैगे..!
भली मयाली मुखुडी देखी..
दगडियो मी ता बौल्या बणी गे..!!

Copyright © 2010, Vinod Jethuri