Monday, 11 October 2010

जै देवभूमी उत्तराखन्ड

देवभूमी उत्तराखन्ड तै समर्पित मेरी या कविता...."जै देवभूमी उत्तराखन्ड" .....

मात्रभूमी पित्रभूमी, देवभूमी यथोयथा ! - २
पंच-बदरी पंच केदार, पंच प्रयाग छन जख !!

शिव जटा बटी आणी छ गंगा मां, गंगा मां की सूणो कथा ! - २
राजा भगीरथ न करी जब, १००० सालो की घोर तपस्या !!

१२०० साल बटी आणी, नन्दा मां तेरी जात्रा ! - २
हर १२ वर्षो मा मां, औन्दा तेरी मैती वाला !!

देवभूमी की कुलदेवी माता, तूमतै नमन करदू सदा ! - २
यी धरती पर क्रपा करी मां, जी पर तेरा भग्त रैदां !!

ऊंची-ऊंची डांडी-कांठी, ठन्डो-ठन्डो पाणी जख ! - २
हरी-भरी हरियाली और, भलू-मयाली, मनखी तख !!

जन्मभूमी, तपोभूमी, पित्रभूमी यथोयथा ! - २
पंच-बदरी पंच केदार, पंच प्रयाग छन जखा !!

Copyright © 2010 Vinod Jethuri

Sunday, 10 October 2010

घौर की खूद


8 अक्टूवर २०१० को काव्य एंव सान्स्क्रतिक सम्मेलन (KESS - 2020) दुबई मे प्रस्तुत की गयी व "ललीता छो छम्म" ग्ढवाली एलबम मे गीत के रुप मे यह कविता..

घौर की आज, याद छ आणी !
मांजी बाबा की, खुद सताणी !! - २
नी मणदू यू, पापी पराण !!!
गांव खोलो की, याद छ आण !!!!

देश पराया, मनखी विराण !
कै मा अपणी, खैरी लगाण !! - २
खुदेन्दू मन, दीन छां कटण !!!
दीन गिणी-गिणी, मन तै बुझाण !!!!
नी मणदू यु पापी पराण
दगडियो गैल्यो की, याद छ आण

सडकियो मा देखा, गाडियो की लैन !
छोटी-छोटी बातो मा, पोडदू छ फ़ैन !! - २
याद आणी छा, चाका की लैन !!!
रोड विचारी कन, बणी रैन्दी मौन !!!!
नी मणदू यू, पापी पराण
दीदी भुली की, याद छ आण

पडोसी अपणू, कू होलू कुजाणी !
एक हैकू दगडी, कभी नी बच्याणी !! - २
कभी हवेगे बिमार ता, कै मा बताण !!!
कन दीन कंटदा, और क्या लगाण !!!!
नी मणदु यू पापी पराण
भैजी भुला की, याद छ आण

छालू पाणी कू, हवेगे स्याणी !
यख देखा ता बस, यू लूण्या पाणी !! - २
याद आणी छ, हरी डान्डी कान्ठी !!!
मेरू पहाड की, रौतेली जमी !!!!
नी मणदू य़ू, पापी पराण
घौर की आज, याद छ आण

उन्ची ईमारत, उन्ची छ शान !
उन्चा छ लोग, उन्चा बच्यान्द !! - २
देश पराया, मनखी विराण !!!
हस्या खिल्या छ्वी, कैमा लगाण !!!!
नी मणदू यू पापी पराण
सुवा प्यारी की भी, याद छ आण

घौर की आज, याद छ आणी !
मांजी बाबा की, खुद सताणी !! - २
नी मणदू यू, पापी पराण !!!
गांव खोलो की, याद छ आण !!!!

विनोद जेठुडी,  अक्टूवर 2010
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Saturday, 2 October 2010

उत्तराखन्ड क शहिदो तै श्रधान्जली



आज ही कू दिन २ अक्टूवर सन १९९४ तै प्रथक राज्य उत्तराखन्ड तै "मुजफ़्फ़रनगर कांड" मा अपण प्राण ख्वे देण वाल शहिदो तै  श्रधांजली.... ऊ शहिदो की वलिदानी उत्तराखन्ड क ईतिहास मा सदा अमर रालू...... "जय उत्तराखन्ड जय भारत"

सूणा उत्तराखन्ड वासी
तूम सूणी ल्यावा
अपण देवभूमी तै
तूम अगने बढावा

याद करा वे दिन
चराणनवे साल..
दवी अक्टूवर दिन
हवेन कन हाल..

मांग उत्तराखन्ड की हम
जाण छ दिल्ली..
मुज्जफ़रनगर मू पहुंची
चली गेन गोली..

कत्यो बहिणियों की मांग सून
कत्यो मां की गोद सून
लाठी मारी बहिण्यो तै
कत्यो की बहगी खून..

ऊ मां-बहिण्यो तै
हमारू प्रणाम
ऊ शहिदो तै
हमारू शलाम

उत्तराखन्ड कू विकास कला
ईन हम काम कला
देवभूमी पर अपणी
आंच कभी नी औणी दयोला

सूणा उत्तराखन्ड वासी
तूम सूणी ल्यावा
अपण देवभूमी तै तूम
अगने बढावा

विनोद जेठुडी, 02 अक्टूवर  2010, 12:49 AM
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Thursday, 23 September 2010

ईन बरखा पैली कभी नी देखी

ईन्द्रदेव जी अब बस भी करा धी.
ईन मुसलाधार बरखा ना लगा धी
जख दिखा पाणी, पाणी हुयू छ..
ये पाणी सी अब, हमतै बचा धी

३२ साल कू रिकार्ड भी टूटी....
ईन बरखा पैली कभी नी देखी
पाणी मा पहाड डुबणा छन..
बस करा अब बहुत हवे ग्यायी

घर कूडी भी पाणी लीगी ग्यायी
गोर-बखरा सभी, बैगी ग्यायी....!
बेघर हुंय़ा छन मेरा पहाड क मनखी
ईन्द्रदेव जी तीन क्या करियाली ?

करोडो कू नुकसान हवे ग्यायी
खीयी-कमायी सब पाणी मा ग्यायी
पाणी बगैर तडपणा छा कभी...
आज पाणी मा सरै पहाड डुबै दयायी

गंगा जी कू पाणी बढी ग्यायी
कोसी नदी उफ़ान मा छायी
सागर नी देखी छ कभी !
टीहरी की झील मा यू भी देखीयाली

सैकडों लोगों की जान चली ग्यायी
स्कूल पढदी बच्चो तैभी नी छ्वाडी
श्रर्धान्जली ऊ दिवंगत आत्माओ तै
जून ये पाणी मा प्राण ख्वे दयायी

विनोद जेठुडी, 21 सितम्बर 2010, 7:18 AM
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Tuesday, 14 September 2010

वक्त हर जख्म तै भूलै देन्दू

क्वी कैकू बगैर, नी मूरदू.!
झूट छ कि मै नी रै सकदू
समय बडू बलवान छ दगडियों ..
वक्त हर जख्म तै भूलै  देन्दू.. !!

चोट लगली ता दर्द भी होलू !
हर दर्द कू क्वी उपचार ता होलू ?
दवैयी क बान भटकणू छौ मी..
यी दवैयी खुनी, कै डाक्टर मू जौलू ?

मी तै यू कन रोग लगी होलू ?
उफ़्फ़, दर्द मेरू यू बढदी जान्दू.
कब ऊ दिन आलू हे दगडियों !
जब मै बटी यू रोग मिटी जालू..

समय लगलू पर ठीक हवे जौलू
मीन भी कैकू दिल दुखै होलू
जन करलू बल तन ही भरलू....
वांकू ही शायद फ़ल मिनू होलू

अपणू तै क्वी, कमी नी चान्दू !
ती खूनी भी मै कमी नी करदू
तीन बस अपणी सूख की सोची..
हैकू कू बारे मा भला क्वी सूचदू ?

क्वी कैकू बगैर, नी मूरदू ...!
झूट छ कि मै नी रै सकदू
समय बडू बलवान छ दगडियों ..
वक्त हर जख्म तै भुलै देन्दू.. !!

Copyright © 2010 Vinod Jethuri, 14th Sep 2010 @ 22:52 PM

Thursday, 9 September 2010

टिपडा (जन्मपत्री)

टिपडा (जन्मपत्री)

दिल ता मिली गे छ पर
टिपडा नी जूडी
नौनू-नौनी की पंसद भी हवेगे छ पर
टिपडा नी जूडी
पहली ता पन्डाजी न बोली कि
टिपडा नी जूडी
पांच सौ कू नौट दिखायी ता
बिन दिख्या...
टिपडा भी फ़ट जूडी..
टिपडो का पैथर
टपरै ग्या हम.
पन्डाजीन बोली ता
भरमै ग्या हम.
कत्का सच्चाई छ यी बात मा
टिपडा नी जूडी ता.!
अनहोनी होली
टिपडा जू जूडी ता
सूख-शान्ति राली.
आवा दगडियो पता लगौला.
सतमगल्यो कू टिपडा जूडौला
औन्सियो कू ब्यो करौला
टिपडो क पैथर.
रुकणा छन जू
ऊ टिपडो तै भूली जौला.

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खुबसूरत उत्तराखन्ड



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खुबसूरत उत्तराखन्ड की खुबसूरत झलकियां


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घौर बटी




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देवभूमी उत्तराखन्ड की खेती और फ़सले..


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